DESH DHARAM DOSTI

क्रांतिदूत


ब्रिटिश सांसदों को गदगद करने वाला प्रधान मंत्री मोदी का भाषण |

Posted: 13 Nov 2015 08:34 PM PST

मुझे लंदन आकर ख़ुशी हुई । यहां तक कि इस वैश्विक दुनिया में, लंदन अभी भी हमारे समय का मानक है। यह वह शहर है, जहाँ दुनिया की विविधता गले मिलती है, और जिसने मानव उपलब्धियों का बेहतरीन प्रतिनिधित्व किया है। और सच कहूं तो ब्रिटिश संसद को संबोधित कर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।

अध्यक्ष महोदय मैं जानता हूँकि इस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा है । इसके बाद भी इस शानदार आयोजन के लिए धन्यवाद ।

सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में समान रूप से भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद हैं | उनके परिश्रम के लिए मेरी शुभकामनाएं । आज ब्रिटेन और भारत के महान दोस्त और प्रख्यात नेतागण यहाँ उपस्थित हैं ।

भारत के आधुनिक इतिहास का काफी कुछ इस इमारत से जुड़ा हुआ है। कई अन्य लोग जोर देकर ऋण और इतिहास की बकाया राशि की बात करते हैं, लेकिन मैं केवल इतना कहूंगा कि भारत के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटेन के संस्थानों में प्रवेश पाया है । और, आधुनिक भारत के अनेक निर्माताओं ने जिनमें मेरे पूर्ववर्ती जवाहर लाल नेहरू से लेकर डॉ मनमोहन सिंह तक शामिल हैं, इन दरवाजों से निकले हैं ।

कई चीजें हैं जिनके लिए यह कहना मुश्किल है कि वे ब्रिटिश हैं या भारतीय | मसलन जगुआर या स्कॉटलैंड यार्ड । ब्रुक बांड चाय या मेरे दोस्त स्वर्गीय मित्र लार्ड गुलाम नून की करी। और, हमारी सबसे मजबूत बहस कि लार्ड की पिच गलत तरीके से स्विंग लेती है या ईडन गार्डन्स की विकेट पर बहुत जल्दी दरारें आ जाती हैं । और, हम लंदन के भांगड़ा रैप को तथा आप भारत के अंग्रेजी उपन्यास को पसंद करते हैं ।

यहाँ आते समय रास्ते में, प्रधानमंत्री कैमरन और मैंने संसद के बाहर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुझे विदेश दौरे के दौरान पूछा गया एक सवाल याद आया। ब्रिटिश संसद के बाहर यह गांधी की प्रतिमा कैसे खडी है? उस प्रश्न पर मेरा जवाब था कि ब्रिटिश लोग महानता की पहचान करने में पर्याप्त बुद्धिमान हैं; भारतीय उनका अनुशरण करने में काफी उदार हैं; हम दोनों भाग्यशाली हैं कि उनके जीवन और आदर्श का स्पर्श हमें मिला; और, हम अपने भविष्य के संबंधों में इतिहास की शक्तियों का उपयोग करने के लिए पर्याप्त चतुर हैं।

इसलिए मैं समझता हूं कि लोकतंत्र के इस मंदिर में मुझे विचार व्यक्त करने का जो सम्मान दिया गया है, वह एक सरकार के आगंतुक प्रमुख के नाते नहीं है | बल्कि मैं एक सहयोगी संस्था और एक साझा परंपरा के प्रतिनिधि के रूप में यहाँ हूँ।

और, कल, प्रधानमंत्री और मैं वेम्बली भी जायेंगे । भारत में भी, हर युवा फुटबॉलर बेकहम की तरह इसे मोड़ देना चाहता है। वेम्बली में एक से डेढ़ लाख जीवन सूत्रों का महोत्सव होगा; डेढ़ लाख लोग – जिन्हें अपनी भारतीय विरासत पर गर्व है; जिन्हें अपने घर ब्रिटेन पर गर्व है।

यह खुशी की अभिव्यक्ति होगी, उन मूल्यों, संस्थाओं, राजनीतिक व्यवस्था, खेल, संस्कृति और कला पर जिनके हम साझेदार हैं । और, यह प्रसन्नता हमारी जीवंत साझेदारी और एक साझे भविष्य की अभिव्यक्ति होगी।

यूनाइटेड किंगडम सिंगापुर और मारीशस के बाद भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है। यूनाइटेड किंगडम भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश परियोजनाओं का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है। भारतीय भी संयुक्त यूरोपीय संघ के बाकी देशों की तुलना में ब्रिटेन में अधिक निवेश करते हैं। यह इसलिए नहीं है कि वे विवेचना कीमत बचाना चाहते हैं,बल्कि इसलिए है, क्योंकि इसके लिए उन्हें स्वागतोत्सुक और परिचित वातावरण मिलता है ।

भारतीय आइकन, टाटा आज आपके देश में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े नियोक्ता हैं, और एक ब्रिटिश आइकन चला रहे हैं ।

भारतीय छात्रों के लिए ब्रिटेन एक पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है। और, मुझे प्रसन्नता है कि एक भारतीय कंपनी सूचना प्रौद्योगिकी कौशल के लिए एक हजार ब्रिटिश छात्रों को भारत ले जा रहा है ।

हम विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सबसे उन्नत क्षेत्रों में एक साथ काम कर रहे हैं। हम भोजन और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी स्थायी मानव समस्याओं का समाधान खोजने के लिए, और जलवायु परिवर्तन जैसी उभरती चुनौतियों के जवाब ढूंढ रहे हैं।

हमारी सुरक्षा एजेंसियां साथ साथ मिलकर काम कर रही हैं ताकि हमारे बच्चे सुरक्षित घर लौट सकें ।

हमारे सशस्त्र बल, एक दूसरे के साथ अभ्यास करते हैं, ताकि वे अधिक मजबूती से उन मूल्यों के लिए खड़े हो सकें जिनका हम प्रतिनिधित्व करते हैं । इसी साल, हमने एक साथ तीन अभ्यास किये हैं ।

अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में, आपके समर्थन से भारत को वैश्विक संस्थाओं और व्यवस्थाओं में उसकी सही जगह मिलना संभव हुआ है । और इससे हम दोनों को अपने साझा हितों को पूरा करने में मदद मिली है।

अध्यक्ष महोदय,

भारत दुनिया के लिए आशा और अवसर का नया उज्ज्वल स्थल है। यह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सिर्फ सार्वभौमिक निर्णय नहीं है। 35 वर्ष से कम आयु के 800 मिलियन लोगों के साथ 1.25 अरब लोगों का यह देश मात्र संख्यात्मक तर्क नहीं है।

यह आशावाद, हमारे युवाओं के उद्यम और ऊर्जा से आता है; जो बदलाव के लिए उत्सुक हैं और जिसे प्राप्त करने का उसे पूरा भरोसा है। यह हमारे कानूनों, नीतियों, संस्थाओं और प्रक्रियाओं में सुधार करने के साहसी और निरंतर उपायों का परिणाम है।

हम हमारे विनिर्माण क्षेत्र का इंजन गतिशील कर रहे हैं; हमारे खेतों को और अधिक उत्पादक और अधिक स्थितिसापेक्ष बना रहे हैं; हमारी सेवाओं को और अधिक नवीन और कुशल बना रहे हैं; हमारे युवाओं में विश्व स्तरीय कौशल निर्माण हेतु तत्परता से प्रयत्न हो रहे हैं; उद्यमों के प्रारम्भ ने एक क्रांति पैदा कर दी है; और, अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे के निर्माण से पृथ्वी पर उसके पद चिन्ह निर्मित होंगे ।

जिस भारत का हम सपना देखते है वह लक्ष्य अभी भी दूर है: सबके लिए आवास, बिजली, पानी और साफ-सफाई; हर नागरिक के लिए बैंक खाते और बीमा;एक दूसरे से जुड़े समृद्ध गांव; और, स्मार्ट और आत्मनिर्भर शहर। किन्तु हमारे ये लक्ष्य मृगमरीचिका नहीं हैं इन्हें हम निश्चित तौर पर प्राप्त करेंगे ।

गांधी जी से प्रेरित परिवर्तन हम प्रारम्भ कर चुके हैं । शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही है तो फैसलों में साहस और गति है।

केन्द्र-राज्य संबंधों का संघवाद कोई गलत लाइन नहीं है, यह टीम इंडिया में एक नई साझेदारी की परिभाषा है। नागरिकों में अब सबूत और प्रक्रिया का बोझ नहीं बल्कि आसान विश्वास है। कारोबार का माहौल खुला और काम करने के लिए आसान है ।

सेल फोन से जुड़े हुए डिजिटल भारत में यह सरकार और जनता के बीच सहज संवाद का माध्यम है ।

अध्यक्ष महोदय,

कवि टी.एस. एलियट से क्षमा याचना के साथ, हम विचार और हकीकत के बीच छाया नहीं गिरने देंगे।

यदि आप भारत की यात्रा पर आयेंगे तो आपको परिवर्तन की हवा का अनुभव होगा।

यह इस बात से परिलक्षित होता है कि दुनिया भर से निवेश में वृद्धि हुई है; हमारी अर्थव्यवस्था में स्थिरता बढी है; 190 लाख नए बैंक खाते आशा और विस्वास के प्रतीक हैं; हमारी वार्षिक विकास वृद्धि दर लगभग 7.5% हुई है; और, कारोबार करने में आसानी के नजरिये से भी हमारी रैंकिंग में तेज वृद्धि हुई है।

हमारा आदर्श वाक्य है सबका साथ सबका विकास | यही हमारे राष्ट्र की दृष्टि भी है, हर नागरिक का सहभाग और समृद्धि ।

यह आव्हान केवल आर्थिक समावेश के लिए नहीं है, यह हमारी विविधता का उत्सव है; सर्वधर्म समभाव; व्यक्तिगत और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता।

यही हमारी संस्कृति का कालातीत लोकाचार है; यही हमारे संविधान का आधार है; और, यही हमारे भविष्य का आधार होगा।

अध्यक्ष महोदय, सदस्यों और दोस्तों,

भारत की प्रगति मानवता के छठे हिस्से की नियति है। और, इसका अर्थ यह भी है कि दुनिया की और अधिक समृद्धि का विश्वास और अधिक सुरक्षित भविष्य।

यह भी स्वाभाविक और अपरिहार्य है कि हमारे आर्थिक संबंध कई गुना बडे हो जायेंगे । यदि हम अपनी अद्वितीय शक्तियों और भारत में अवसरों के आकार और पैमाने को संयुक्त कर दें तो हम अपराजेय साझेदार बन जायेंगे ।

हम और अधिक निवेश और व्यापार को देखेंगे। सेवा के क्षेत्र में नए दरवाजे खुल जायेंगे । हम यहां और भारत में, रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और अधिक सहयोग करेंगे । हम अक्षय और परमाणु ऊर्जा पर एक साथ काम करेंगे।

हम विज्ञान के रहस्यों का पता लगाने और प्रौद्योगिकी और नवाचार की शक्ति का उपयोग करेंगे । हमें डिजिटल दुनिया के अवसरों का एहसास होगा। और हमारे युवा एक दूसरे से साथ साथ सीखेंगे ।

अध्यक्ष महोदय,

हम उस युग में हैं, जब दुनिया में अनेक बदलाव हो रहे हैं । हमें अभी भी भविष्य की संभावनाओं को समझना है | यह उस दुनिया से भिन्न होगी, जिसे हम जानते हैं ।

तो, हमारे अनिश्चित समय के अज्ञात जल में, हमें एकदूसरे की मदद से इस दुनिया के लिए एक स्थिर दिशा खोजनी होगी, जिसमें हमारे साझा आदर्शों की झलक हो ।

इसमें न केवल हमारे दोनों देशों की सफलता है, बल्कि विश्व के लिए भी एक वायदा है, जो हम चाहते हैं । हमारे पास हमारी भागीदारी की शक्ति और संयुक्त राष्ट्र, राष्ट्रमंडल और जी -20 की सदस्यता है।

हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं, जहाँ सुदूर क्षेत्र की अस्थिरता भी शीघ्र हमारे दरवाजे तक पहुँच जाती है । इसे हम कट्टरता और शरणार्थियों की चुनौती के रूप में देखते हैं।

गलत लाइनें राष्ट्रों की सीमा पारकर उसकी लहरें हमारे समाज और हमारे शहरों की गलियों में प्रवाहित हो रही हैं । आतंकवाद और उग्रवाद की वैश्विक शक्ति अपने बदलते नाम, समूहों, प्रदेशों और लक्ष्य की तुलना में बढ़ती जा रही है ।

हमारे समय की इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए पूरी दुनिया को एक स्वर में बोलना और एक सुर में कार्यवाई करना चाहिए। हमें बिना किसी देरी के अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र का एक व्यापक सम्मेलन बुलाना चाहिए। आतंकवादी समूहों में कोई भेद नहीं किया जाना चाहिए और ना ही देशों के बीच कोई भेदभाव होना चाहिए। उन्हें अलग थलग करने का संकल्प लेना होगा जो आतंकवादियों को प्रश्रय देते हैं और उन देशों के साथ दृढ इच्छाशक्ति के साथ खड़ा होना होगा जो आतंकवाद से ईमानदारी से जूझ रहे हैं | जो देश इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, उनमें चरमपंथ के खिलाफ एक सामाजिक आंदोलन चलाने की आवश्यकता है, और धर्म को आतंकवाद से अलग करने के लिए हर संभव प्रयास की जरूरत है।

महासागर हमारी समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब, हमें अपने साइबर और बाह्य अंतरिक्ष को भी सुरक्षित करना है। हमारे हितों में कई क्षेत्रों में जुड़ रहे हैं। स्थिर, समृद्ध और एकीकृत दक्षिण एशिया में हमारा साझा हित है, उस दिशा में मिलकर बढ़ने से ही हम समृद्ध होंगे ।

हम एक ऐसा अफगानिस्तान चाहते हैं, जो महान अफगान लोगों के सपनों के अनुरूप हो, नाकि तर्कहीन भय और दूसरों की अदम्य महत्वाकांक्षाओं से प्रभावित ।

एक शांतिपूर्ण, स्थिर हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक वाणिज्य और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। और, एशिया प्रशांत क्षेत्र का भविष्य हम सब पर गहरा असर डालेगा। हम दोनों को पश्चिम एशिया और खाड़ी के देशों पर बहुत अधिक ध्यान देना होगा ।

और, अफ्रीका जहाँ कई चुनौतियों के बाबजूद हम साहस, ज्ञान, नेतृत्व और उद्यम के इतने आशाजनक संकेत देखते हैं । भारत में अभी एक अफ्रीका शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें सभी 55 देशों के और 42 नेताओं ने भाग लिया ।

हमें अपने ग्रह के टिकाऊ भविष्य के लिए एक कम कार्बन युग लांच करने के लिए परस्पर सहयोग करना चाहिए। यह एक वैश्विक जिम्मेदारी है जिसे इस महीने के अंत में पेरिस में हमें स्वीकार कर लेना चाहिए ।

दुनिया में सामूहिक कार्रवाई का एक सुंदर संतुलन तैयार हो जिसमें संयुक्त किन्तु अलग-अलग जिम्मेदारी और संतुलित क्षमता हो ।

जिनके पास साधन हैं और जिन्हें पता है कि कैसे स्वच्छ ऊर्जा और स्वस्थ वातावरण बने, उन्हें मानवता की सार्वभौमिक आकांक्षा को पूरा करने में मदद करनी चाहिए। और जब हम संयम की बात करते हैं, तब हमें केवल जीवाश्म ईंधन पर अंकुश लगाने के बारे में ही नहीं, बल्कि हमारे जीवन शैली को उस अनुरूप ढालने के बारे में भी सोचना चाहिए।

हम सबको अपने हिस्से का काम करना चाहिए। भारत ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में 175 गीगावॉट अतिरिक्त क्षमता का लक्ष्य रखा है और 2030 तक 33-35% उत्सर्जन तीव्रता में कमी लाने के लिए एक व्यापक रणनीति जैसे दो कदम उठाये हैं।

मैंने COP 21 की बैठक में, सबसे असंबद्ध गांवों में सौर ऊर्जा को हमारे जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सौर एलायंस लांच करने का प्रस्ताव दिया था ।

संभवतः ब्रिटेन में आप आमतौर पर बारिश और उसके बाद सूरज से बचने के लिए छाते का उपयोग करते है। लेकिन, मेरी टीम ने सौर गठबंधन की सदस्यता को और अधिक सटीक शब्दों में परिभाषित किया है: आपको उष्णकटिबंधीय के भीतर स्थित होने की आवश्यकता है ।

हमें प्रसन्नता है कि यूनाइटेड किंगडम इसके योग्य है ! अतः आगे इस प्रयास में ब्रिटेन को हम एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखते हैं। वस्तुतः प्रधानमंत्री कैमरन और मुझे प्रसन्नता है कि, सस्ती और सुलभ स्वच्छ ऊर्जा पर सहयोग हमारे संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ है ।

अध्यक्ष महोदय,

यह हमारे दोनों महान देशों के लिए एक बहुत बड़ा क्षण है। तो, हमें अवसरों को पकड़कर सहयोग में आने वाली बाधाओं को दूर कर, हमारे संबंधों में पूर्ण विश्वास पैदा करने और एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए।

ऐसा करने के लिए हमें हमारी सामरिक भागीदारी को अग्रणी वैश्विक साझेदारियों में से एक के रूप में परिवर्तित करना होगा। अमूमन सदैव ब्रिटेन के सबसे प्रसिद्ध बार्ड के अनुसार हमें मनुष्य के संबंधों के ज्वार को संजोना चाहिए, दुनिया कार्य करने की प्रेरणा चाहती है। और, इसलिए हमें यही करना चाहिए।

लेकिन, हमारी भागीदारी के उद्देश्य को परिभाषित करने के लिए हमें भारत के महान सपूत की तरफ मुड़ना चाहिए, जिनका घर लंदन में है, मैं उसे शनिवार को सामाजिक न्याय के मुद्दे हेतु समर्पित करूंगा । हम अब डॉ बी आर अम्बेडकर की 125 वीं जयंती मना रहे हैं | वे केवल भारत के संविधान और हमारे संसदीय लोकतंत्र के ही वास्तुकार नहीं थे, बल्कि वे सदैव कमजोर, दीन और वंचितों के उत्थान के लिए खडे रहे । उन्होंने हम सबको मानवता की सेवा का एक बड़ा मकसद दिया; वह मकसद है सभी मनुष्यों के लिए न्याय, समानता, अवसर और गरिमा के भविष्य का निर्माण कर शांति लाने का ।

यही वह कारण है जिसके लिए भारत और ब्रिटेन ने आज खुद को समर्पित कर दिया है ।

बहुत बहुत धन्यवाद, बहुत बहुत धन्यवाद ।